श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.25.95 
ब्रह्मारे ईश्वर चतुःश्लोकी ये कहिला ।
ब्रह्मा नारदे सेइ उपदेश कैला ॥95॥
 
 
अनुवाद
श्रीमद्भागवत के उन चार श्लोकों में भगवान ने ब्रह्माजी से जो कुछ कहा था, वही ब्रह्माजी ने नारदजी को भी समझाया था।
 
“Whatever the Supreme Personality of Godhead had said to Brahmaji in those four verses of Srimad Bhagavatam, Brahmaji explained the same to Narada also.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)