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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  2.25.90 
तुमि त’ ईश्वर, तोमार आछे सर्व - शक्ति ।
सङ्क्षेप - रूपे कह तुमि शुनिते हय मति ॥90॥
 
 
अनुवाद
"आप पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं, अतः आपमें अकल्पनीय शक्तियाँ हैं। मैं आपसे ब्रह्मसूत्र के विषय में संक्षेप में सुनना चाहता हूँ।"
 
"You are the Supreme Personality of Godhead, and therefore possess inconceivable powers. I would like to hear from you briefly about the Brahma Sutras."
तात्पर्य
प्रकाशानंद सरस्वती बोले कि मैं पहले ही श्री चैतन्य महाप्रभु के ब्रह्म-सूत्र के प्रत्यक्ष अर्थ की व्याख्या से अवगत हो चुका हूँ। फिर भी, मैं प्रभु से निवेदन करता हूँ कि वे अब संक्षेप में ब्रह्म-सूत्र, वेदांत-सूत्र का तात्पर्य बताएँ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)