श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.25.88 
मायावादे करिला यत दोषेर आख्यान ।
सबे एइ जा नि’ आचार्येर कल्पित व्याख्यान ॥88॥
 
 
अनुवाद
प्रकाशानंद सरस्वती ने कहा, "आपने मायावाद दर्शन में जो दोष बताए हैं, उन्हें हम समझ सकते हैं। शंकराचार्य द्वारा दी गई सभी व्याख्याएँ काल्पनिक हैं।"
 
Prakashananda Saraswati said, "We can understand the flaws you have pointed out in the Mayavada philosophy. All the explanations given by Shankaracharya are imaginary."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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