श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  2.25.80 
यस्तु नारायणं देवं ब्रह्म - रुद्रादि - दैवतैः ।
समत्वेनैव वीक्षेत स पाषण्डी भवेद्भुवम् ॥80॥
 
 
अनुवाद
“‘जो व्यक्ति ब्रह्मा और शिव जैसे देवताओं को नारायण के समान मानता है, उसे अपराधी, पाषण्डी माना जाना चाहिए।’”
 
“A person who considers gods like Brahma and Shiva to be equal to Narayana should be considered a heretic or a criminal.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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