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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.25.64 
“हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः ।
गोपाल गोविन्द राम श्री - मधुसूदन” ॥64॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने जप किया, "हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः, गोपाल गोविंद राम श्रीमधुसूदन।"
 
They were chanting “Harye Namah Krishna Yadvay Namah, Gopal Govind Ram Shri Madhusudan”.
तात्पर्य
यह हरे कृष्ण महामंत्र का एक और उच्चारण करने का तरीका है। अर्थ यों हैं: "मैं ईश्वर कृष्ण को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ। वो यदु वंश के वंशज हैं। मुझे गोपाल, गोविंद, राम और श्री मधुसूदन को श्रृद्धापूर्वक नमन करने दें।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)