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अनुवाद
"वेद, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और पुराण सभी भगवान की आध्यात्मिक शक्ति की गतिविधियों का वर्णन करते हैं। यदि कोई भगवान की व्यक्तिगत गतिविधियों को स्वीकार नहीं कर सकता, तो वह मूर्खतापूर्ण उपहास करता है और एक निराकार वर्णन देता है।
"The Vedic literature, the Upanishads, the Brahmasutras, and all the Puranas describe the activities of the Lord's spiritual energy. If man cannot accept the personal activities of the Lord, he foolishly ridicules them and offers impersonal descriptions."
तात्पर्य
वैदिक साहित्य में, पुराणों के साथ, कृष्ण की आध्यात्मिक सामर्थ्य का पूरा वर्णन है। भगवान के सभी लीलाएँ अनंत, आनंदमय और ज्ञान से परिपूर्ण हैं, जैसे कृष्ण का अपना रूप अनंत, आनंदमय और ज्ञान से परिपूर्ण है (सच्चिदानंद-विग्रह)। थोड़े ज्ञान वाले अज्ञानी लोग अपने अस्थायी शरीर की तुलना कृष्ण के आध्यात्मिक शरीर से करते हैं, और ऐसी मूर्खता से वे कृष्ण को अपने जैसा समझने की कोशिश करते हैं। अवजानंति माम मूढ़ा मानुषीं तनुमाश्रितम्। भगवद् गीता (9.11) बताती है की मूर्ख लोग कृष्ण को अपने जैसा ही समझते हैं। उनकी आध्यात्मिक सामर्थ्य को न समझते हुए, वे निरपेक्ष सत्य के व्यक्तिगत रूप की आलोचना करते हैं, मूर्खतावश खुद को पूर्ण सत्य को जानने वाले ज्ञानी मानते हैं। वे यह नहीं समझ सकते कि जैसे भगवान की भौतिक ऊर्जा की अनेक क्रियाएँ हैं, वैसे ही आध्यात्मिक उर्जा में भी विविधता है। वे भक्ति सेवा में क्रियाओं को भौतिक चेतना में क्रियाओं के समान मानते हैं। ऐसे ही गलत धारणा के तहत, वे कभी कभी भगवान की आध्यात्मिक क्रियाओं और उनकी भक्ति सेवा के बारे में मजाक करने का दुस्साहस करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥