श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.25.27 
आचार्य - कल्पित अर्थ ये पण्डित शुने ।
मुखे ‘हय’ ‘हय’ करे, हृदय ना माने ॥27॥
 
 
अनुवाद
"शंकराचार्य की सभी व्याख्याएँ काल्पनिक हैं। ऐसी काल्पनिक व्याख्याएँ विद्वानों द्वारा मौखिक रूप से स्वीकार की जाती हैं, परन्तु वे हृदय को प्रभावित नहीं करतीं।"
 
"All of Shankaracharya's interpretations are imaginary. Pandits may accept such imaginary interpretations verbally, but they do not resonate with their hearts."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas