श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 266
 
 
श्लोक  2.25.266 
श्री - भागवत - तत्त्व - रस करिला प्रचारे ।
कृष्ण - तुल्य भागवत, जानाइला संसारे ॥266॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने स्वयं श्रीमद्भागवत के दिव्य सत्यों और रसों का उपदेश दिया है। श्रीमद्भागवत और भगवान एक ही हैं, क्योंकि श्रीमद्भागवत श्रीकृष्ण का ध्वनि अवतार है।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu himself preached the divine truths and essences of Srimad Bhagavatam.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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