श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 265
 
 
श्लोक  2.25.265 
कृष्ण - तत्त्व, भक्ति - तत्त्व, प्रेम - तत्त्व सार ।
भाव - तत्त्व, रस - तत्त्व, लीला - तत्त्व आर ॥265॥
 
 
अनुवाद
कृष्णभावनामृत का अर्थ है कृष्ण के सत्य को समझना, भक्ति का सत्य, भगवद्प्रेम का सत्य, भावनात्मक आनंद का सत्य, दिव्य मधुरता का सत्य तथा भगवान की लीलाओं का सत्य।
 
Krishna consciousness means understanding the truth of Krishna, the truth of devotion, the truth of love for God, the truth of emotional love, the truth of divine essences and the truth of the Lord's pastimes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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