श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 252
 
 
श्लोक  2.25.252 
त्रयोदशे - रथ - आगे प्रभुर नर्तन ।
चतुर्दशे - ‘हेरा - पञ्चमी’ - यात्रा - दरशन ॥252॥
 
 
अनुवाद
तेरहवें अध्याय में मैंने श्री चैतन्य महाप्रभु के जगन्नाथ के रथ के आगे नृत्य का वर्णन किया है। चौदहवें अध्याय में हेरापंचमी समारोह का वर्णन है।
 
In the thirteenth chapter, I have described the dance of Sri Chaitanya Mahaprabhu before the chariot of Lord Jagannatha. The fourteenth chapter details the Hera Panchami festival.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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