श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 251
 
 
श्लोक  2.25.251 
एकादशे - श्री - मन्दिरे ‘बेड़ा - सङ्कीर्तन’ ।
द्वादशे - गुण्डिचा - मन्दिर - मार्जन - क्षालन ॥251॥
 
 
अनुवाद
ग्यारहवें अध्याय में मैंने भगवान के चारों ओर व्याप्त हरे कृष्ण महामंत्र के महान जप का वर्णन किया है। बारहवें अध्याय में मैंने गुंडिका मंदिर की शुद्धि और स्नान का वर्णन किया है।
 
In the eleventh chapter I have described the great chanting of the Hare Krishna mantra that surrounded Mahaprabhu. In the twelfth chapter I have described the cleaning and washing of the Gundicha temple.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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