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श्लोक 2.25.25  |
उपनिषदेर करेन मुख्यार्थ व्याख्यान ।
शुनिया पण्डित - लोकेर जुड़ाय मन - काण ॥25॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु उपनिषदों का सीधा अर्थ समझाते हैं। जब सभी विद्वान इसे सुनते हैं, तो उनके मन और कान तृप्त हो जाते हैं। |
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| "Sri Chaitanya Mahaprabhu explains the direct meaning of the Upanishads. When all the learned listen to this, their minds and ears are satisfied." |
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