श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.25.25 
उपनिषदेर करेन मुख्यार्थ व्याख्यान ।
शुनिया पण्डित - लोकेर जुड़ाय मन - काण ॥25॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु उपनिषदों का सीधा अर्थ समझाते हैं। जब सभी विद्वान इसे सुनते हैं, तो उनके मन और कान तृप्त हो जाते हैं।
 
"Sri Chaitanya Mahaprabhu explains the direct meaning of the Upanishads. When all the learned listen to this, their minds and ears are satisfied."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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