श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 235
 
 
श्लोक  2.25.235 
सबा सङ्गे लञा प्रभु मिश्र - वासा आइला ।
सार्वभौम, पण्डित - गोसाञि निमन्त्रण कैला ॥235॥
 
 
अनुवाद
भगवान् अपने सभी भक्तों के साथ काशी मिश्र के घर गए। सार्वभौम भट्टाचार्य और पंडित गोसांई ने भी भगवान् को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया।
 
Then Mahaprabhu and his devotee went to the residence of Kashi Mishra. Sarvabhauma Bhattacharya and Pandit Gosain also invited Mahaprabhu to dine at their homes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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