श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 226
 
 
श्लोक  2.25.226 
आनन्दे विह्वल भक्त - गण धाञा आइला ।
नरेन्द्रे आसिया सबे प्रभुरे मिलिला ॥226॥
 
 
अनुवाद
सभी भक्तगण प्रसन्नता से अभिभूत होकर भगवान के दर्शन के लिए शीघ्रता से चल पड़े। वे नरेन्द्र सरोवर नामक प्रसिद्ध सरोवर के तट पर उनसे मिले।
 
Overwhelmed with immense joy, all the devotees ran to meet Mahaprabhu. They met him on the banks of the famous lake Narendra Sarovar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)