रूप - गोसाञि, आइले ताँरे बहु प्रीति कैला ।
आपन - सङ्गे लञा ‘द्वादश व न’ देखाइला ॥207॥
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अनुवाद
जब रूप गोस्वामी मथुरा पहुँचे, तो सुबुद्धि राय उनके प्रति प्रेम और स्नेह के कारण उनकी अनेक प्रकार से सेवा करना चाहते थे। वे स्वयं रूप गोस्वामी को वृंदावन के सभी बारह वनों के दर्शन कराने ले गए।
When Rupa Goswami arrived in Mathura, Subuddhi Rai, out of love and affection, wanted to serve him in many ways. He personally took Rupa Goswami to see the twelve forests of Vrindavan.
तात्पर्य
श्रील रूप गोस्वामी हुसैन शाह की सरकार में मंत्री रहे थे। हुसैन शाह सुबुद्धि राय को भी जानते थे, क्योंकि एक बच्चे के रूप में शाह सुबुद्धि राय के नौकर थे। ऐसा प्रतीत होता है कि सुबुद्धि राय वृद्ध थे, फिर भी जब वे मथुरा में रह रहे थे, उन्होंने रूप गोस्वामी को वृंदावन के बारह वन दिखाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥