श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 203
 
 
श्लोक  2.25.203 
मथुरा आसिया राय प्रभु - वार्ता पाइल ।
प्रभुर लाग ना पाञा मने बड़ दुःख हैल ॥203॥
 
 
अनुवाद
मथुरा पहुँचकर सुबुद्धि राय को भगवान की यात्रा की सूचना मिली। भगवान से संपर्क न कर पाने के कारण वे बहुत दुखी हुए।
 
Upon reaching Mathura, Subuddhi Raya learned of Mahaprabhu's program. He was deeply saddened because he could not contact Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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