| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना » श्लोक 201 |
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| | | | श्लोक 2.25.201  | पाञा आज्ञा राय वृन्दावनेरे चलिला ।
प्रयाग, अयोध्या दिया नैमिषारण्ये आइला ॥201॥ | | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु से वृन्दावन जाने का आदेश पाकर सुबुद्धि राय ने वाराणसी छोड़ दिया और प्रयाग, अयोध्या और नैमिषारण्य से होते हुए वृन्दावन की ओर चले गये। | | | | In this way, after getting permission from Sri Chaitanya Mahaprabhu to go to Vrindavan, Subuddhi Rai left from Varanasi and went towards Vrindavan via Prayag, Ayodhya and Naimisharanya. | | ✨ ai-generated | | |
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