एक ‘नामाभा से’ तोमार पाप - दोष ग्राबे ।
आर ‘नाम’ लइते कृष्ण - चरण पाइबे ॥199॥
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अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने सुबुद्धि राय को आगे सलाह दी: "हरे कृष्ण मंत्र का जप शुरू करो, और जब तुम्हारा जप लगभग शुद्ध हो जाएगा, तो तुम्हारे सभी पाप कर्म दूर हो जाएँगे। जब तुम पूरी तरह से जप कर लोगे, तो तुम्हें कृष्ण के चरण कमलों की शरण मिलेगी।"
Sri Chaitanya Mahaprabhu also advised Subuddhi Rai, "Start chanting the Hare Krishna mantra, and when your chanting becomes almost pure, all the results of your sinful actions will disappear. After chanting properly, you will find refuge in the lotus feet of Krishna."
तात्पर्य
दस प्रकार के अपराधों पर विचार किया जाना चाहिए। प्रारंभ में, जब किसी को हरे कृष्ण महामंत्र के जप में आरंभ किया जाता है, स्वाभाविक रूप से कई अपराध होते हैं। इसलिए भक्त को इन अपराधों से बचने और विशुद्ध रूप से जप करने की बहुत सावधानीपूर्वक कोशिश करनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि हरे कृष्ण महामंत्र कभी शुद्ध है और कभी अशुद्ध। बल्कि, भौतिक संदूषण के कारण जपकर्ता अशुद्ध होता है। उसे अपने आप को शुद्ध करना होता है ताकि पवित्र नाम पूर्ण रूप से प्रभावी हो सके। प्रभु के पवित्र नाम का जप करने से व्यक्ति को कृष्ण के चरण कमलों में तत्काल आश्रय मिलेगा। इसका अर्थ यह है कि विशुद्ध रूप से जप करने से, व्यक्ति तुरंत पारलौकिक मंच पर स्थित हो जाएगा। हालाँकि, हमें ध्यान देना चाहिए कि श्री चैतन्य महाप्रभु के निर्देशों के अनुसार, हरे कृष्ण मंत्र का जप करने से पहले किसी को भी खुद को शुद्ध करने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। हमारी स्थिति चाहे जो भी हो, हमें तुरंत जप शुरू करना चाहिए। हरे कृष्ण मंत्र की शक्ति से, हम धीरे-धीरे सभी भौतिक संदूषणों से मुक्त हो जाएँगे और जीवन के अंतिम लक्ष्य कृष्ण के चरण कमलों में आश्रय प्राप्त करेंगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥