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अनुवाद
नवाब द्वारा अपने ऊपर जल छिड़कने को एक अवसर मानकर, सुबुद्धि राय ने अपना परिवार और व्यापारिक कार्य छोड़ दिया और वाराणसी चले गये।
Considering the sprinkling of water on him by the Nawab as a good opportunity, Subudhi Rai left his family and business and came to Varanasi.
तात्पर्य
ऐसा प्रतीत होता है कि सुबुद्धि राया एक बड़े ज़मींदार और एक जिम्मेदार, आदरणीय सज्जन थे। हालाँकि, वह इस सामाजिक भ्रांति से बच नहीं पाए कि अगर किसी मुसलमान के घड़े से किसी के चेहरे पर पानी छिड़का जाए तो वह मुसलमान बन जाता है। दरअसल वह अपना भौतिक जीवन त्यागने और अपने परिवार को छोड़ने की योजना बना रहे थे। हिंदू संस्कृति में चार विभाग होते हैं - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। सुबुद्धि राया संन्यास लेने के बारे में सोच रहे थे और कृष्ण की कृपा से उन्हें यह अवसर मिला। इसलिए उन्होंने अपना परिवार छोड़ दिया और वाराणसी चले गए। वर्णाश्रम-धर्म की व्यवस्था बहुत वैज्ञानिक है। यदि कोई वर्णाश्रम संस्था द्वारा निर्देशित है, तो वह स्वाभाविक रूप से अपने जीवन के अंत में गृहस्थ जीवन से सेवानिवृत्त होने के बारे में सोचेगा। इसलिए पचास वर्ष की आयु में संन्यास लेना अनिवार्य है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥