श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 186
 
 
श्लोक  2.25.186 
एथा रूप - गोसाञि यबे मथुरा आइला ।
न्रुव - घाटे ताँरे सुबुद्धि - राय मिलिला ॥186॥
 
 
अनुवाद
जब रूप गोस्वामी मथुरा पहुंचे, तो उनकी मुलाकात यमुना के तट पर ध्रुवघाट नामक स्थान पर सुबुद्धि राय से हुई।
 
When Rupa Goswami reached Mathura, he met Subuddhi Rai at a place called Nruvaghat on the banks of the Yamuna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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