श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.25.16 
ताहाँ यैछे कैला प्रभु सन्न्यासीर निस्तार।
पञ्च - तत्त्वाख्याने ताहा करियाछि विस्तार ॥16॥
 
 
अनुवाद
आदि-लीला के सातवें अध्याय में मैं पहले ही श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा मायावादी संन्यासियों के उद्धार का वर्णन कर चुका हूँ, जब मैंने पंचतत्व - श्री चैतन्य महाप्रभु, श्री नित्यानंद प्रभु, अद्वैत प्रभु, गदाधर प्रभु और श्रीवास - की महिमा का वर्णन किया था।
 
I have already described the salvation of the Mayavadi sannyasis by Sri Chaitanya Mahaprabhu in the seventh chapter of Adilila while describing the glories of the Panchatattva - Sri Chaitanya Mahaprabhu, Sri Nityananda Prabhu, Advaita Prabhu, Gadadhara Prabhu and Srivasa.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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