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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  2.25.153 
अतएव भागवत करह विचार ।
इहा हैते पाबे सूत्र - श्रुतिर अर्थ - सार ॥153॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने प्रकाशानंद सरस्वती को सलाह दी, "श्रीमद्भागवत का गहन अध्ययन करो। तभी तुम्हें ब्रह्मसूत्र का वास्तविक अर्थ समझ में आएगा।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu advised Prakashananda Saraswati, "Study the Srimad Bhagavatam with utmost diligence. Then you will be able to understand the true meaning of the Brahma Sutras."
तात्पर्य
पवित्र भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते हैं कि श्रीमद् भागवतम का अध्ययन किए बिना कोई ब्रह्म-सूत्र (वेदांत-सूत्र) या उपनिषदों के उद्देश्य को समझ नहीं सकता। यदि कोई वेदांत दर्शन और उपनिषदों को श्रीमद् भागवतम का अध्ययन किए बिना समझने की कोशिश करता है, तो उसे चकमा मिलेगा, और एक अलग अर्थ का निर्माण करके, धीरे-धीरे एक नास्तिक या एक अवैयक्तिकवादी बन जाएगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)