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अनुवाद
“सभी गोपियाँ कृष्ण के दिव्य गुणों का उच्च स्वर में कीर्तन करने के लिए एकत्रित हुईं और उन्मत्तियों की तरह एक वन से दूसरे वन में भटकने लगीं। वे उस भगवान के बारे में जिज्ञासा करने लगीं, जो सभी जीवों में, आंतरिक और बाह्य रूप से, विराजमान हैं। यहाँ तक कि उन्होंने सभी वनस्पतियों और वनस्पतियों से भी उस परम पुरुष के बारे में पूछा।”
"All the gopis gathered to loudly chant the divine qualities of Krishna and began wandering from forest to forest like mad women. They began to inquire about the Lord within and outside all beings. Indeed, they were also asking all the plants and vegetation about the Supreme Being.
तात्पर्य
यह श्रीमद् भागवतम (10.30.4) से उद्धृत है। गोपियाँ अचानक से कृष्ण के रास नृत्य छोड़ कर जाने के कारण लगभग पागल हो गई थीं। चूंकि गोपियाँ कृष्ण के विचारों में पूरी तरह लीन थीं, वे उनके अलग-अलग आसनों और लीलाओं की नकल कर रही थीं। उसकी अनुपस्थिति के कारण वे बहुत दुखी हो गईं, और इस घटना को शुकदेव गोस्वामी ने महाराजा परीक्षित को समझाया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥