श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.25.122 
सर्व - देश - काल - दशाय जनेर कर्त व्य ।
गुरु - पाशे सेइ भक्ति प्रष्टव्य, श्रोतव्य ॥122॥
 
 
अनुवाद
' 'अतः प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह - प्रत्येक देश में, प्रत्येक परिस्थिति में और हर समय - एक प्रामाणिक आध्यात्मिक गुरु के पास जाए, उनसे भक्ति सेवा के बारे में प्रश्न करे और उनसे प्रक्रिया की व्याख्या सुने।
 
“Therefore, it is the duty of every person in every country, in every situation and at all times to go to a bona fide Guru, ask him questions about devotion and listen to his explanation of devotion.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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