श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.25.121 
‘धर्मादि’ विषये यैछे ए ‘चारि’ विचार ।
साधन - भक्ति - एइ चारि विचारेर पार ॥121॥
 
 
अनुवाद
"जहाँ तक धार्मिक सिद्धांतों का प्रश्न है, व्यक्ति, देश, काल और परिस्थिति का विचार किया जाता है। किन्तु, भक्ति में ऐसे कोई विचार नहीं होते। भक्ति इन सभी विचारों से परे है।"
 
"Religious principles consider person, place, time, and condition. But devotion does not. Devotion transcends all these considerations.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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