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अनुवाद
"जब कोई दिव्य स्थिति में स्थित होता है, तो वह मेरा साक्षात्कार कर सकता है। यह साक्षात्कार ही परमेश्वर के साथ उसके संबंध का आधार है। अब मैं इस विषय को और स्पष्ट करता हूँ।
A person who has attained divine status can experience Me. This experience is the basis of a relationship with God. I will elaborate on this topic further.
तात्पर्य
वास्तविक अध्यात्मिक ज्ञान का प्राप्त होना ज़रूरी है, यह प्राप्ति प्रकट शास्त्रों से ही होनी चाहिए। यह ज्ञान प्राप्त हो जाने पर व्यक्ति अपनी वास्तविक अध्यात्मिक जीवन की अनुभूति कर सकता है। कयास आधारित ज्ञान अधूरा होता है। ज्ञान परम्परा पद्धति और गुरु से प्राप्त करना चाहिए, अन्यथा व्यक्ति भ्रमित हो जाएगा और अंततः निर्वैयक्तिकवादी हो जाएगा। जो व्यक्ति वास्तविक अध्यात्मिक ज्ञान पर गहराई से विचार करता है, वह परम सत्य की व्यक्तिगत विशेषता को समझ सकता है। ईश्वर का सर्वोच्च व्यक्तित्व हमेशा भौतिक सृष्टि से परे है। नारायणः परो व्यक्तात्:"इस भौतिक संसार के परे भगवान नारायण का निवास है"। यह भौतिक संसार की एक रचना नहीं है। आध्यात्मिक ज्ञान को साकार किए बिना कोई यह नहीं समझ सकता कि प्रभु का आध्यात्मिक रूप हमेशा रचनात्मक ऊर्जा से परे है। सूर्य और धूप का उदाहरण दिया गया है। धूप सूर्य नहीं है, लेकिन फिर भी धूप अलग से सूर्य से नहीं है। अचिन्त्य भेद अभेद तत्व (एकता और भिन्नता का एक साथ होना) का दर्शन वह व्यक्ति समझ नहीं सकता जो पूर्ण रूप से बाहरी ऊर्जा के प्रभाव में है। परिणामस्वरूप भौतिक ऊर्जा के प्रभाव में रहने वाले व्यक्ति परम सत्य के व्यक्तित्व की प्रकृति और रूप को नहीं समझ सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥