आमि - ‘सम्बन्ध’ - तत्त्व, आमार ज्ञान - विज्ञान ।
आमा पाइते साधन - भक्ति’ अभिधे य’ - नाम ॥103॥
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अनुवाद
[भगवान कृष्ण कहते हैं:] 'मैं सभी संबंधों का केंद्र हूँ। मेरा ज्ञान और उस ज्ञान का व्यावहारिक प्रयोग ही वास्तविक ज्ञान है। भक्ति के लिए मेरे पास आना अभिधेय कहलाता है।'
"(Lord Krishna says:) 'I am the center of all relationships. Knowledge about me and the practical application of that knowledge is real knowledge. Coming to me for devotion is called Abhidheya.'"
तात्पर्य
आध्यात्मिक ज्ञान का अर्थ है पूर्ण रूप से परम सत्य को तीनों विशेषताओं - निराकार ब्रह्म, सर्वव्यापी परमात्मा और सर्वशक्तिमान परम भगवान - को समझना। आख़िरकार जब कोई परम भगवान के चरण कमलों में शरण लेता है और भगवान की सेवा में संलग्न हो जाता है, तो परिणामी ज्ञान को विज्ञान, विशेष ज्ञान या आध्यात्मिक ज्ञान का व्यावहारिक अनुप्रयोग कहा जाता है। जीवन के उद्देश्य, जिसे प्रयोजन कहा जाता है, को प्राप्त करने के लिए भगवान की भक्ति सेवा में संलग्न होना चाहिए। उस जीवन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भक्ति सेवा का अभ्यास अभिधेय कहलाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥