श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.24.82 
‘ब्रह्म - आत्मा’ - शब्दे यदि कृष्णेरे कहय ।
‘रूढ़ि - वृत्त्ये’ निर्विशेष अन्तर्यामी कय ॥82॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि 'ब्रह्म' और 'आत्मा' शब्द कृष्ण को इंगित करते हैं, किन्तु उनका प्रत्यक्ष अर्थ क्रमशः निराकार ब्रह्म और परमात्मा ही है।
 
“Although the words ‘Brahma’ and ‘Soul’ are indicative of Krishna, their direct meanings are indicative of impersonal Brahma and Paramatma respectively.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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