श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.24.76 
अहमेवास मेवाग्रे नान्यद् यत्सदसत्परम् ।
पश्चादहं यदेतच्च योऽवशिष्येत सोऽस्म्यहम् ॥76॥
 
 
अनुवाद
"ब्रह्मांडीय सृष्टि से पूर्व, केवल मैं ही विद्यमान हूँ, और कोई भी वस्तु, चाहे वह स्थूल हो, सूक्ष्म हो या आदि, विद्यमान नहीं है। सृष्टि के पश्चात्, प्रत्येक वस्तु में केवल मैं ही विद्यमान हूँ, और प्रलय के पश्चात् केवल मैं ही शाश्वत रूप से विद्यमान रहता हूँ।"
 
"Before creation, I alone exist; there is no gross, subtle, or primordial element. After creation, I alone exist in everything, and after destruction, I alone remain eternally."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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