श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.24.65 
‘च’ ‘अपि’, दुई शब्द ताते ‘अव्यय’ हय ।
येइ अर्थ लागाइये, सेइ अर्थ हय ॥65॥
 
 
अनुवाद
“जब इस श्लोक में संयोजक ‘च’ [‘और’] और ‘अपि’ [‘यद्यपि’] जोड़ दिए जाते हैं, तो श्लोक को जो भी अर्थ देना हो, दिया जा सकता है।
 
“When the two words, the conjunction cha and the adverb api, are added to this verse, any meaning desired can be derived from this verse.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)