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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 320
 
 
श्लोक  2.24.320 
ब्रूहि योगेश्वरे कृष्णे ब्रह्मण्ये धर्म - वर्मणि ।
स्वां काष्ठामधुनोपेते धर्मः कं शरणं गतः ॥320॥
 
 
अनुवाद
अब जब परम सत्य भगवान श्रीकृष्ण समस्त योगशक्तियों के स्वामी होकर अपने धाम को चले गए हैं, तो कृपया हमें बताइए कि वर्तमान में धार्मिक सिद्धांतों की रक्षा कौन कर रहा है।
 
“Now that the Supreme Truth, Yogeshwara Sri Krishna has departed for His abode, please tell us who is protecting the Dharma at this time.”
तात्पर्य
यह श्लोक श्रीमद्‌-भागवत (1.1.23) से है। शौनक के नेतृत्व में सभी ऋषियों ने यह सवाल किया था। महान भक्त सूत गोस्वामी के सामने रखा गया यह सवाल छह सवालों में सर्वप्रमुख है। इस महत्वपूर्ण सवाल का उत्तर अगले श्लोक में दिया गया है, जो श्रीमद्‌-भागवत (1.3.43) से ही है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)