श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 318
 
 
श्लोक  2.24.318 
कृष्ण - तुल्य भागवत - विभु, सर्वाश्रय ।
प्रति - श्लोके प्रति - अक्षरे नाना अर्थ कय ॥318॥
 
 
अनुवाद
"श्रीमद्भागवतम्, भगवान् कृष्ण के समान ही महान है, जो परम प्रभु और सभी वस्तुओं के आश्रय हैं। श्रीमद्भागवतम् के प्रत्येक श्लोक और प्रत्येक अक्षर में विविध अर्थ निहित हैं।
 
“Srimad Bhagavatam is as great as Krishna, who is the Supreme Lord and the refuge of all.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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