श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 297
 
 
श्लोक  2.24.297 
सरूपाणामेक - शेष एक - विभक्तौ ,
उक्तार्थानामप्रयोग इति ॥297॥
 
 
अनुवाद
“‘समान रूप और कारक अंत वाले शब्दों में से, केवल अंतिम शब्द ही बरकरार रखा जाता है।’
 
“Of all the words having the same form and the same inflection, only the last one is allowed to remain.”
तात्पर्य
यह पाणिनि के सूत्रों (१.२.६४) का एक उद्धरण है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)