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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 284
 
 
श्लोक  2.24.284 
आर अर्थ शुन, याहा - अर्थेर भाण्डार ।
स्थूले ‘दुइ’ अर्थ, सूक्ष्मे ‘बत्रिश’ प्रकार ॥284॥
 
 
अनुवाद
"एक और अर्थ है, जो अनेक अर्थों से भरा है। दरअसल, इसके दो स्थूल अर्थ हैं और बत्तीस सूक्ष्म अर्थ हैं।"
 
There is another meaning, one that is full of various nuances. In fact, there are two gross meanings and thirty-two subtle meanings.
तात्पर्य
ये दो स्थूल अर्थ नियमनपूर्वक भक्ति और सहज भक्ति का उल्लेख करते हैं। बत्तीस सूक्ष्म अर्थ भी हैं। विनियमन भक्ति के नाम के अधीन, (१) भगवान के एक निजी सहयोगी के रूप में स्वार्थी को समझने के आधार पर सोलह अर्थ हैं, (२) एक निजी मित्र, (३) व्यक्तिगत माता-पिता या ऐसे ही वरिष्ठ, (४) एक निजी प्रिय, (५) आध्यात्मिक साधना द्वारा उन्नत एक नौकर, (६) आध्यात्मिक साधना द्वारा एक मित्र, (७) भक्ति सेवा की खेती द्वारा माता-पिता और श्रेष्ठ भक्त, (८) भक्ति सेवा की खेती द्वारा एक प्यारी पत्नी या महिला मित्र, (९) एक सेवक के रूप में एक परिपक्व भक्त, (१०) एक मित्र के रूप में एक परिपक्व भक्त, (११) एक माता-पिता और श्रेष्ठ के रूप में एक परिपक्व भक्त, (१२) एक पत्नी और प्रिय के रूप में एक परिपक्व भक्त, (१३) एक सेवक के रूप में एक अपरिपक्व भक्त, (१४) एक मित्र के रूप में एक अपरिपक्व भक्त, (१५) एक पिता या श्रेष्ठ के रूप में एक अपरिपक्व भक्त, और (१६) एक प्रिय के रूप में एक अपरिपक्व भक्त। इसी तरह, सहज भक्ति के शीर्षक के अधीन भी सोलह विभिन्न सहयोगी हैं। इसलिए विनियमित भक्तों और सहज भक्तों के शीर्षकों के तहत भक्तों की कुल संख्या बत्तीस है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)