इससे भगवद्गीता (9.22) के कथन की पुष्टि होती है कि भगवान अपने वैष्णव भक्तों के लिए सभी आवश्यक वस्तुएँ स्वयं वहन करते हैं। नारद मुनि ने उस पूर्व शिकारी से पूछा कि उसकी आजीविका कैसे चल रही थी, और उसने उत्तर दिया कि हर कोई जो उससे मिलने आता था, वह उसके लिए भरण-पोषण के लिए कुछ न कुछ ले आता था। कृष्ण, जो हर किसी के हृदय में विराजमान हैं, कहते हैं, "मैं व्यक्तिगत रूप से एक वैष्णव के लिए सभी आवश्यक वस्तुएँ वहन करता हूँ।" वह किसी को भी यह करने का आदेश दे सकते हैं। हर कोई एक वैष्णव को कुछ देने को तैयार होता है, और यदि एक वैष्णव पूरी तरह से भक्ति सेवा में लगा हुआ है, तो उसे अपने भरण-पोषण की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
