यारे देख, तारे कह 'कृष्ण'-उपदेश
आमार आज्ञाय गुरु हाँ ताँरा' एइ देश
(चै.मध्य 7.128)
श्री चैन्य महाप्रभु की यही इच्छा है कि हर कोई वैष्णव और गुरु बने। श्री चैन्य महाप्रभु और उनकी शिष्य परंपरा के निर्देशों का पालन करके कोई भी गुरु बन सकता है, क्योंकि प्रक्रिया बहुत आसान है। कोई भी कृष्ण के निर्देशों का प्रचार करने के लिए हर जगह जा सकता है। भगवद्गीता कृष्ण के निर्देश हैं; इसलिए हर वैष्णव का कर्तव्य है कि वह भगवद्गीता का प्रचार करे और यात्रा करे, फिर भले ही वह अपने देश में या किसी दूसरे देश में हो। नारद मुनि के चरणों पर चलना ही स्पर्श-मणि की कसौटी है।
