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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 256
 
 
श्लोक  2.24.256 
व्याध कहे , - ‘येइ कह, सेइ त’ करिब’ ।
नारद कहे , - ‘धनुक भाङ्ग, तबे से कहि ब’ ॥256॥
 
 
अनुवाद
शिकारी ने तब कहा, ‘मेरे प्रिय महोदय, आप जो कहेंगे मैं वही करूंगा।’
 
"Then the hunter said, 'My lord, I will do whatever you say.' Narada immediately ordered him, 'First break your bow. Then I will tell you what to do.'
तात्पर्य
"नारद ने तुरंत उसे आज्ञा दी, ' सबसे पहले अपने धनुष को तोड़ दो। फिर मैं तुम्हें बताऊंगा कि आगे क्या करना होगा।'

यह दीक्षा की प्रक्रिया है। शिष्य को यह व्रत लेना चाहिए कि वह अब पापमय कार्य नहीं करेगा - अर्थात अवैध यौन संबंध, मांस खाना, जुआ और नशा करना। वह गुरु की आज्ञा का पालन करने का वादा करता है। फिर गुरु उसकी देखभाल करता है और उसे आध्यात्मिक मुक्ति की ओर ले जाता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)