श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 255
 
 
श्लोक  2.24.255 
नारद कहे , - ’यदि धरे आमार वचन ।
तबे से करिते पारि तोमार मोच न’ ॥255॥
 
 
अनुवाद
नारद मुनि ने शिकारी को आश्वासन दिया, 'यदि तुम मेरी बात मानोगे तो मैं तुम्हारी मुक्ति का मार्ग ढूंढ लूंगा।'
 
“Narada Muni assured the hunter, ‘If you listen to my teachings, I will find a way to liberate you.’
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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