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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 255
 
 
श्लोक  2.24.255 
नारद कहे , - ’यदि धरे आमार वचन ।
तबे से करिते पारि तोमार मोच न’ ॥255॥
 
 
अनुवाद
नारद मुनि ने शिकारी को आश्वासन दिया, 'यदि तुम मेरी बात मानोगे तो मैं तुम्हारी मुक्ति का मार्ग ढूंढ लूंगा।'
 
“Narada Muni assured the hunter, ‘If you listen to my teachings, I will find a way to liberate you.’
तात्पर्य
गौराँगर भक्तगणे जने जने शक्ति धारे। इस गीत का तात्पर्य यह है कि भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के भक्त बहुत शक्तिशाली हैं, और उनमें से प्रत्येक संपूर्ण विश्व को उद्धार कर सकता है। फिर नारद मुनि की क्या बात करें? यदि कोई नारद मुनि के निर्देशों का पालन करता है, तो उसे किसी भी पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं से मुक्त किया जा सकता है। यह प्रक्रिया है। एक आध्यात्मिक गुरु के निर्देशों का पालन करना चाहिए; तो निश्चित रूप से सभी पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी। यही सफलता का रहस्य है। यस्य देवे परा भक्तिर यथा देवे तथा गुरौ। यदि किसी के पास कृष्ण और आध्यात्मिक गुरु में दृढ़ विश्वास है, तो परिणाम है, यस्यैते कथिता ह्यर्था: प्रकाशाते महत:मना ह:प्रकट ग्रंथों के सभी निष्कर्ष ऐसे व्यक्ति के लिए खुले होंगे। कृष्ण का शुद्ध भक्त वही माँग कर सकता है जो नारद मुनि कर रहे हैं। वे कहते हैं, "यदि तुम मेरे निर्देशों का पालन करते हो, तो मैं तुम्हारे उद्धार की जिम्मेदारी लूँगा।" नारद जैसा शुद्ध भक्त किसी भी पापी व्यक्ति को आश्वासन दे सकता है क्योंकि भगवान की कृपा से ऐसे भक्त को किसी भी पापी व्यक्ति को उद्धार करने का अधिकार प्राप्त होता है यदि वह व्यक्ति निर्धारित सिद्धांतों का पालन करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)