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अनुवाद
शिकारी ने तब स्वीकार किया कि उसे अपने पाप कर्म का पूरा यकीन हो गया है, और उसने कहा, 'मुझे बचपन से ही यह सिखाया गया है। अब मैं सोच रहा हूँ कि मैं इन असीम पाप कर्मों से कैसे मुक्त हो सकता हूँ।'
"The hunter admitted his sins. He said, 'I have been trained in this profession since childhood. Now I am thinking about how I can free myself from my countless sins.'"
तात्पर्य
यह प्रकार का प्रायश्चित बहुत लाभदायक है, जब तक कि व्यक्ति फिर से पाप न करे। छल-कपट और पाखंड को उच्च अधिकारी बर्दाश्त नहीं करते। यदि कोई समझता है कि पाप क्या है, तो वह उसे ईमानदारी और पछतावे के साथ छोड़ दे और परम देव के चरण कमलों में अपने एजेंट, शुद्ध भक्त के माध्यम से समर्पण कर दे। इस प्रकार, कोई पाप की प्रतिक्रियाओं से मुक्त हो सकता है और भक्ति सेवा में प्रगति कर सकता है। हालाँकि, यदि कोई कुछ प्रायश्चित करने के बाद भी पाप करते रहता है, तो वह नहीं बचेगा। शास्त्रों में, ऐसे प्रायश्चित की तुलना एक हाथी के स्नान से की गई है। हाथी बहुत अच्छा स्नान करता है और अपने शरीर को बहुत अच्छी तरह से साफ करता है, लेकिन जैसे ही वह पानी से बाहर आता है, वह किनारे पर कुछ धूल उठाकर अपने पूरे शरीर पर फेंक देता है। प्रायश्चित बहुत अच्छी तरह से किया जा सकता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति पाप करते रहता है तो इससे उसकी कोई मदद नहीं होगी। इसलिए शिकारी ने सबसे पहले साधु व्यक्ति नारद के सामने अपने पापपूर्ण कृत्य को स्वीकार किया और फिर पूछा कि वह कैसे बच सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥