वैदिक सिद्धांतों के अनुयायी होने के नाते, हम इस संबंध में नारद मुनि के बयानों को स्वीकार करते हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि हम देखें कि किसी को भी पापपूर्ण गतिविधियों के कारण पीड़ा न हो। मूर्ख बदमाशों को भगवद-गीता में मायापहृत-ज्ञानः के रूप में वर्णित किया गया है, जो इंगित करता है कि यद्यपि वे सतही रूप से शिक्षित हैं, माया ने उनका वास्तविक ज्ञान छीन लिया है। ऐसे लोग वर्तमान में मानव समाज का नेतृत्व कर रहे हैं। श्रीमद् भागवतम् में उन्हें अंधो यथां धैर उपनीयमानाः के रूप में वर्णित किया गया है। ये बदमाश स्वयं अंधे होते हैं, और फिर भी वे दूसरों को नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं जो अंधे होते हैं। जब लोग ऐसे नेताओं का अनुसरण करते हैं, तो वे भविष्य में असीमित पीड़ा सहते हैं। तथाकथित प्रगति के बावजूद, यह सब हो रहा है। कौन सुरक्षित है? कौन सुखी है? कौन चिंतामुक्त है?
