श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  2.24.247 
कालि हैते तुमि येइ मृगादि मारिबा ।
प्रथमेइ मारिबा, अर्ध - मारा ना करिबा ॥247॥
 
 
अनुवाद
“‘मैं आपसे विनती करता हूँ कि आज के बाद आप जानवरों को पूरी तरह से मार डालेंगे और उन्हें आधा मरा हुआ नहीं छोड़ेंगे।’
 
“I request you that from today onwards you will kill the animals completely and will not leave them half dead.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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