श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 242
 
 
श्लोक  2.24.242 
व्याध कहे , - “शुन, गोसाञि, ‘मृगारि’ मोर नाम ।
पितार शिक्षाते आमि करि ऐछे काम” ॥242॥
 
 
अनुवाद
शिकारी ने उत्तर दिया, 'हे साधु पुरुष, मेरा नाम मृगारि है, मैं पशुओं का शत्रु हूँ। मेरे पिता ने मुझे इस प्रकार उन्हें मारना सिखाया था।'
 
The hunter replied, "Oh saintly man, my name is Mrigaari, meaning enemy of animals. My father taught me to kill them in this manner."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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