एक दिन श्री - नारद दे खि’ नारायण ।
त्रिवेणी - स्नाने प्रयाग करिला गमन ॥230॥
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अनुवाद
एक समय की बात है, महान संत नारद वैकुंठ में भगवान नारायण के दर्शन करने के बाद, तीन नदियों - गंगा, यमुना और सरस्वती - के संगम पर स्नान करने के लिए प्रयाग गए।
“Once the great sage Narada Muni, after meeting Lord Narayana in Vaikuntha, went to Prayag to take a bath at the confluence of the three rivers – Ganga, Yamuna and Saraswati.”
तात्पर्य
महान संत नारद इतने मुक्त हैं कि वे वैकुंठ ग्रहों पर जाकर नारायण के दर्शन कर सकते हैं और फिर तुरंत इस ग्रह पर भौतिक संसार में आकर प्रयाग जा सकते हैं और तीन नदियों के संगम में स्नान कर सकते हैं। त्रि-वेणी शब्द तीन नदियों के संगम को दर्शाता है। यह संगम अभी भी सैकड़ों-हजारों लोगों द्वारा देखा जाता है जो वहां स्नान करने जाते हैं, विशेष रूप से माघ-मेले के दौरान, जो जनवरी के महीने में होता है। एक मुक्त व्यक्ति, जिसके पास भौतिक शरीर नहीं होता है, वह कहीं भी और हर जगह जा सकता है; इसलिए एक जीवित सत्ता को सर्व-गा कहा जाता है, जो इंगित करता है कि वह कहीं भी और हर जगह जा सकता है। वर्तमान में वैज्ञानिक अन्य ग्रहों पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अपने भौतिक शरीर के कारण, वे अपनी इच्छा से मुक्त होकर नहीं जा सकते हैं। हालाँकि, जब कोई अपने मूल आध्यात्मिक शरीर में स्थित होता है, तो वह बिना किसी कठिनाई के कहीं भी और हर जगह जा सकता है। इस भौतिक दुनिया के भीतर सिद्धलोक नामक एक ग्रह है, जिसके निवासी मशीन या अंतरिक्ष रॉकेट की सहायता के बिना एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर जा सकते हैं। भौतिक संसार में हर ग्रह का एक विशिष्ट लाभ (विभूति-भिन्न) होता है। आध्यात्मिक संसार में, हालांकि, सभी ग्रह और उनके निवासी आध्यात्मिक ऊर्जा से बने होते हैं। क्योंकि कोई भौतिक बाधा नहीं होती है, इसलिए यह कहा जाता है कि आध्यात्मिक संसार में सब कुछ एक है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥