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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 224
 
 
श्लोक  2.24.224 
कृष्ण - मनने मुनि कृष्णे सर्वदा भजय ।
‘आत्मारामा अ पि’ भजे, - गौण अर्थ कय ॥224॥
 
 
अनुवाद
"जो संत पुरुष सदैव कृष्ण का ध्यान करते हैं, वे भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं। आत्माराम भी भगवान की सेवा में लगे रहते हैं। यही अप्रत्यक्ष तात्पर्य है।
 
"Those saintly men who always meditate on Krishna are engaged in devotional service to the Lord. Atmaram is also engaged in the service of the Lord. This is the secondary meaning."
तात्पर्य
शब्द ca के अन्वय अर्थ से यह पता चलता है कि ca शब्द से समास किये गये दो शब्दों में से एक को अधिक महत्व दिया जाता है और दूसरे को गौण माना जाता है। उदाहरण के लिए, हे ब्रम्हचारी, कृपया बाहर जाओ और भीख लो और साथ ही गायों को लाओ। इस कथन में, भीख का संग्रह प्रथम महत्व का है, और गायों को एकत्र करने का दूसरा व्यवसाय गौण है। इसी तरह, जो व्यक्ति हमेशा कृष्ण का ध्यान करता है, वह मुख्य रूप से कृष्ण का भक्त है जो उनकी भक्ति सेवा में लगा हुआ है। अन्य आत्मारामा भक्ति सेवा में अधीनस्थ हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)