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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.24.20 
शक्ति, कम्प, परिपाटी, युक्ति, शक्त्ये आक्रमण ।
चरण - चालने काँपाइल त्रिभुवन ॥20॥
 
 
अनुवाद
'क्रम' का अर्थ 'शक्ति', 'कंपन', 'एक व्यवस्थित तरीका', 'तर्क' और 'आगे बढ़कर किया गया बलपूर्वक आक्रमण' भी है। इस प्रकार वामन ने तीनों लोकों को कंपा दिया।
 
"'Krama' also has other meanings: power, trembling, method, force, and to advance and attack forcefully. In this way, Vamana shook the three worlds."
तात्पर्य
उरु का अर्थ है "बहुत बड़ा", और क्रमा अर्थ है "कदम"। जब भगवान वामनादेव को भूमि के तीन कदम प्रदान किए गए, तो उन्होंने अपने तीनों चरणों का विस्तार पूरे ब्रह्मांड को ढंकते हुए किया। इस प्रकार तीनों लोकों में कंपन हो गया, और इसलिए भगवान विष्णु के अवतार श्री वामनादेव को उरुक्रम कहा जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)