श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.24.189 
अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते ।
इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भाव - समन्विताः ॥189॥
 
 
अनुवाद
"मैं [कृष्ण] सबका मूल स्रोत हूँ। सब कुछ मुझसे ही उत्पन्न होता है। जो बुद्धिमान लोग इसे भली-भाँति जानते हैं, वे प्रेम और भक्तिपूर्वक मेरी सेवा में लगे रहते हैं।"
 
"I (Krishna) am the source of everything. Everything emanates from me. The wise who understand this well, engage themselves in my service with love and devotion."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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