vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ
»
श्लोक 173
श्लोक
2.24.173
तेषां सतत - युक्तानां भजतां प्रीति - पूर्वकम् ।
ददामि बुद्धि - योगं तं येन मामुपयान्ति ते ॥173॥
अनुवाद
“‘जो लोग निरंतर प्रेमपूर्वक मेरी सेवा में लगे रहते हैं, मैं उन्हें वह समझ देता हूँ जिसके द्वारा वे मेरे पास आ सकते हैं।’
“To those who are constantly engaged in My devotion and serve Me with love, I give wisdom by which they can come to Me.”
तात्पर्य
यह भागवद-गीता (10.10) से एक उद्धरण है। व्याख्या के लिए, आदी-लीला 1.49 देखें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×