श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.24.165 
‘आत्मा’ शब्दे ‘मन’ कह - मने येइ रमे ।
साधु - सङ्गे सेह भजे श्री - कृष्ण - चरणे ॥165॥
 
 
अनुवाद
“‘आत्मा’ शब्द का अर्थ कभी-कभी ‘मन’ होता है। इस स्थिति में ‘आत्माराम’ शब्द का अर्थ है ‘ऐसा व्यक्ति जो मानसिक चिंतन से संतुष्ट होता है।’ जब ऐसा व्यक्ति किसी शुद्ध भक्त की संगति करता है, तो वह कृष्ण के चरण कमलों की भक्ति करने लगता है।
 
"Sometimes the word 'atma' means 'mind.' In that case, the word 'atmarama' would mean one who is satisfied by mental contemplation. When such a person associates with a pure devotee, he begins to worship the lotus feet of Krishna."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd