श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  2.24.162 
च - शब्दे ‘अपि’र अर्थ इहाङो कहय ।
‘मुनि’, ‘निर्ग्रन्थ’ - शब्देर पूर्ववतर्थ हय ॥162॥
 
 
अनुवाद
"यहाँ 'च' और 'अपि' शब्दों के अर्थ लागू किए जा सकते हैं। 'मुनि' और 'निर्ग्रन्थ' शब्दों के अर्थ पहले जैसे ही हैं।"
 
"The meanings of the words 'cha' and 'api' can be used here. The meanings of the words 'muni' and 'nirgrantha' remain the same."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)