vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ
»
श्लोक 162
श्लोक
2.24.162
च - शब्दे ‘अपि’र अर्थ इहाङो कहय ।
‘मुनि’, ‘निर्ग्रन्थ’ - शब्देर पूर्ववतर्थ हय ॥162॥
अनुवाद
"यहाँ 'च' और 'अपि' शब्दों के अर्थ लागू किए जा सकते हैं। 'मुनि' और 'निर्ग्रन्थ' शब्दों के अर्थ पहले जैसे ही हैं।"
"The meanings of the words 'cha' and 'api' can be used here. The meanings of the words 'muni' and 'nirgrantha' remain the same."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×