एकादश पद एइ श्लोके सुनिर्मल ।
पृथक् नाना अर्थ पदे करे झलमल ॥10॥
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अनुवाद
“इस श्लोक में ग्यारह स्पष्ट शब्द हैं, लेकिन जब उनका अलग-अलग अध्ययन किया जाता है, तो प्रत्येक शब्द से विभिन्न अर्थ झलकते हैं।
“There are eleven distinct words in this verse, but when studied separately, each word reveals a variety of meanings.”
तात्पर्य
ग्यारह अलग-अलग शब्द हैं (1) आत्मारामः, (2) च, (3) मुनयः, (4) निर्ग्रन्थः, (5) अपि, (6) उरुक्रमे, (7) कुर्वन्ति, (8) अहैतुकिम, (9) भक्तिम्, (10) इत्थं-भूत-गुणः, और (11) हरिः। श्री चैतन्य महाप्रभु इन शब्दों के विभिन्न अर्थों और आयातों की व्याख्या करेंगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥